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एक बात मुझे समझ में नहीं आती

एक बात मुझे समझ में नहीं आती वह ना जाने क्यों मुझसे नाराज रहते हैं पहचानने की कोशिश करती हूं उनकी बेरुखी का कारण क्या है कोई राज नहीं खुलता है कोशिशों की दहलीज पर नाकाम रहती हूं

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मंजिलें धीरे-धीरे तुम्हारे करीब आएंगी

मंजिलें धीरे-धीरे तुम्हारे करीब आएंगी सही दिशा में आगे बढ़ते रहो दूरियों को देखकर जो हार जाओगे मंजिलें ख्वाब बनकर रह जाएंगी सफलता की राहों में सिर्फ मात आओगे

अपनी मजबूरियों को बताते हुए

अपनी मजबूरियों को बताते हुए तुम क्या सोचती हो तुम्हें भूल पाऊंगा तुम्हारे जाने के बाद एक जिंदा लाश की तरह रह जाऊंगा

समझो अगर तुम इशारा

 समझो अगर तुम इशारा सब कुछ कह दिया होठ खामोश है ना जाने क्या सोचकर आंखों से सब कुछ बयां कर दिया साफ इजहार करने को तड़पता हूं कोई तो मुझको बेजुबा कर दिया