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मैं इजहार करता रहा

 मैं इजहार करता रहा वह घूमाती रही मेरे दिल में उसके के लिए कितना प्यार है आजमाती रही प्यार उसको भी था बस यूं ही इनकार करके सताती रही

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मंजिलें धीरे-धीरे तुम्हारे करीब आएंगी

मंजिलें धीरे-धीरे तुम्हारे करीब आएंगी सही दिशा में आगे बढ़ते रहो दूरियों को देखकर जो हार जाओगे मंजिलें ख्वाब बनकर रह जाएंगी सफलता की राहों में सिर्फ मात आओगे

अपनी मजबूरियों को बताते हुए

अपनी मजबूरियों को बताते हुए तुम क्या सोचती हो तुम्हें भूल पाऊंगा तुम्हारे जाने के बाद एक जिंदा लाश की तरह रह जाऊंगा

एक बात मुझे समझ में नहीं आती

एक बात मुझे समझ में नहीं आती वह ना जाने क्यों मुझसे नाराज रहते हैं पहचानने की कोशिश करती हूं उनकी बेरुखी का कारण क्या है कोई राज नहीं खुलता है कोशिशों की दहलीज पर नाकाम रहती हूं